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वैदिक अनुष्ठान, कर्मकांड एवं ज्योतिषीय गणना

उज्जैन को तिल भर बड़ा होने का गौरव प्राप्त है, यहां की गई कोई भी पूजन करने से शिव परिवार की कृपा के साथ ही अन्य देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, ऐसा ग्रंथों में उल्लेख है।

वैदिक अनुष्ठान, कर्मकांड एवं ज्योतिषीय गणना करने में तीर्थ नगरी उज्जैन का सर्वोच्च स्थान हैं, माँ क्षिप्रा की गोद में बसा, जिसके राजा स्वयं बाबा महाकाल  हैं, यहाँ सभी वेदोक्त-शास्त्रोक्त पद्धति से किये जाने वाले अनुष्ठान, पूजन, जाप, अभिषेक, हवन-यज्ञादि, साधना-सिद्धि, तंत्र-मंत्र-यंत्र से शत-प्रतिशत अभीष्ट व् मनचाहे फल प्राप्त होता हैं।

उज्जयिनी के पंडितो आचार्यो, शास्त्रियों एवं ज्योतिषियों आदि विद्वानों का सम्मान पुरे विश्व में किया जाता हैं यहाँ के पंडितों ने पुरे भारत वर्ष में समय समय पर अपना लोहा मनवाया हैं।  यहाँ के ज्ञाताओं विद्वानों का पुराणों में उल्लेख हैं। उज्जयिनी का इतिहास इसे विद्वानों और ज्ञाताओं के नाम से भी जनता हैं  इसीलिए कल गणना में उज्जैन का स्थान सर्व प्रथम आता हैं।

अवंतिका खंड में भैरव तीर्थ तथा नागतीर्थ का भी उल्लेख है, चूंकि जन्मेजय के नाग सत्र के बाद जरकतारू पुत्र आस्तिक मुनि के द्वारा नाग सत्र रोका गया था और उनका स्थान परिवर्तित किया गया था, उसमें महाकाल वन की कई सीमा ली गई थी, यह भी एक कारण है कि यहां की गई पूजा सफल होती है। उज्जैन नागों का शरण स्थली भी रहा है, इसलिए यहां नाग पूजा की मान्यता शास्त्रों में वर्णित है।

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